अंतर्राष्ट्रीय

Pakistan: आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को आई भारत की याद; शहबाज बोले- वार्ता को तैयार, युद्ध विकल्प नहीं

नई दिल्ली। एक तरफ गहराता राजनीतिक संकट और दूसरी तरफ बिगड़ती आर्थिक स्थिति। इन हालातों से जूझते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सीधे तौर पर भारत से बातचीत की पेशकश की है। इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम शरीफ ने कहा है कि पड़ोसी देश (भारत) बातचीत के लिए गंभीर हो तो उनकी सरकार उससे हर मुद्दे पर वार्ता को करने तैयार है।

पिछली बार भी भारत ने नहीं की थी कोई टिप्‍पणी

पिछले वर्ष सत्ता में आने के बाद यह दूसरा मौका है जब पीएम शरीफ ने भारत के साथ बातचीत की पेशकश की है। हालांकि पूर्व में वह वार्ता की बात करने के बाद मुकर गये थे। वैसे आधिकारिक तौर पर भारत ने तब भी उनके प्रस्ताव पर कोई टिप्पणी नहीं की थी और मंगलवार को देर शाम तक भी विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

शहबाज ने कहा, युद्ध कोई विकल्‍प नहीं

लेकिन जानकार बता रहे हैं कि अब जबकि पाकिस्तान में जल्द ही आम चुनाव होने वाले हैं और कुछ महीनों बाद भारत में भी चुनाव होंगे तब इस तरह की वार्ता की संभावना कम ही है। पीएम शरीफ ने कहा कि, “पाकिस्तान हर देश से बात करना चाहता है। हम किसी के भी खिलाफ नहीं है। हमें अपने मुल्क को बनाना है। हम अपने पड़ोसी देश के साथ भी हर मुद्दे पर बात करने को तैयार हैं बशर्ते वह भी गंभीरता से आगे आये। क्योंकि अब युद्ध कोई विकल्प नहीं है।”

इसके बाद उन्होंने भारत व पाकिस्तान के परमाणु शक्ति होने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि, “पाकिस्तान अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियार रखे हुए है। हमारे बीच पिछले 75 वर्षों में तीन युद्ध हो चुके हैं। मैं इमानदारी से बताता हूं कि इससे गरीबी व बेरोजगारी बढ़ी है और आम जनता की भलाई के लिए, शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए कम फंड कम बचे हैं।”

अपनी बातों से पलट जाते हैं पाकिस्‍तानी नेता

शरीफ के मुताबिक, भारत व पाकिस्तान को एक सामान्य पड़ोसी बनना होगा और इसके लिए उन्हें अपने बीच की असामान्य स्थिति को दूर करनी होगी। शरीफ के इस प्रस्ताव को लेकर भारत के कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि, “इस तरह की बात पाक के पीएम पहले भी कर चुके हैं। उनसे पहले पूर्व पीएम इमरान खान भी रह-रह कर भारत के साथ शांति वार्ता की बात करते थे लेकिन फिर कुछ ही दिनों बाद अपनी बात से पलट जाते हैं।”

इस वजह से शहबाज के प्रस्‍ताव को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता

शरीफ ने पहले जब शांति वार्ता की बात की थी तब उसके कुछ ही दिन बाद कश्मीर को इससे जोड़ दिया था। मंगलवार को उन्होंने कश्मीर का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया बल्कि यह कहा है कि दोनों देशों के बीच जो भी मुद्दे हैं। पाकिस्तान को अभी आर्थिक संकट से उबरने के लिए विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद की जरूरत होगी।

यह भी वजह हो सकती है कि वह भारत को लेकर नरमी दिखा रहे हों। वैसे भी कुछ दिनों बाद पाकिस्तान में आम चुनावों की घोषणा होने वाली है और शरीफ की जगह किसी दूसरे नेता को कार्यवाहक पीएम बनाया जाएगा। ऐसे में उनके प्रस्ताव को अभी गंभीरता से नहीं लिया जा सकता।

धारा 370 की समाप्‍त‍ि के बाद से ही तल्‍ख हैं दोनों देशों के रिश्‍ते

सनद रहे कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते काफी लंबे समय से खराब हैं। अगस्त, 2019 में जब भारत ने जम्मू व कश्मीर से धारा 370 समाप्त करने का फैसला किया था तबसे रिश्ते और ज्यादा खराब हुए हैं। पाकिस्तान ने भारत स्थिति अपने उच्चायोग की क्षमता भी काफी घटा दी है। हाल ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत (गोवा) आये थे।

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